सीधी जिले के बहरी क्षेत्र में एक महिला के साथ हुई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वीडियो सामने आते ही न सिर्फ स्थानीय स्तर पर, बल्कि जिलेभर में इस घटना को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पीड़िता ने पूरे मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए प्रशासन से सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
पीड़िता की पहचान हेमा सिंह के रूप में हुई है, जो अपने पति रघुवंश प्रताप सिंह के साथ बहरी थाना क्षेत्र के भनवार गांव की निवासी बताई जा रही हैं। हेमा सिंह बहरी बाजार में गोमती और ठेला लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। उनका कहना है कि यही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और बाजार में मेहनत-मजदूरी कर वह घर चलाती हैं।
पीड़िता के अनुसार, घटना से एक दिन पहले देर रात उनकी गोमती और ठेला जबरन हटवा दिए गए थे। इस संबंध में उन्होंने बहरी थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। शिकायत के बावजूद अब तक ठेला बरामद नहीं हो सका है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पीड़िता का आरोप है कि शिकायत के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे असामाजिक तत्वों के हौसले और बढ़ गए।
इसी क्रम में 8 फरवरी 2026 की सुबह करीब 10 बजे बहरी बाजार में हेमा सिंह के साथ कथित तौर पर लाठी-डंडों, लात-घूंसों से मारपीट की गई। इतना ही नहीं, उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया गया। यह पूरी घटना बाजार में लोगों की मौजूदगी में हुई, लेकिन कोई भी व्यक्ति खुलकर बीच-बचाव करता नजर नहीं आया। मारपीट के दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो वायरल होने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। लोगों में आक्रोश है कि दिनदहाड़े एक महिला के साथ इस तरह की हिंसा कैसे हो सकती है और बाजार में मौजूद लोग मूकदर्शक कैसे बने रहे। वहीं पीड़िता का कहना है कि यदि समय रहते लोग मदद के लिए आगे आते, तो शायद स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।


मामले में एक और पहलू सामने आया है, जिसने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग घटना से जुड़े एक व्यक्ति को राजनीतिक रूप से जोड़कर भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं। इस संबंध में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित व्यक्ति न तो सिहावल विधायक विश्वामित्र पाठक का करीबी है और न ही किसी राजनीतिक दल का अधिकृत कार्यकर्ता। बताया जा रहा है कि वह पेशे से पत्रकार है और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई लोगों के साथ उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं, जिनका गलत तरीके से इस्तेमाल कर अफवाहें फैलाई जा रही हैं।
घटना को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विवाद की असल शुरुआत कैसे हुई, गोमती और ठेला हटवाने के पीछे कौन लोग थे, बाजार में मौजूद लोगों ने महिला को बचाने का प्रयास क्यों नहीं किया और वीडियो बनाने वाले व्यक्ति का उद्देश्य क्या था—इन सभी बिंदुओं पर जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
फिलहाल पीड़िता हेमा सिंह न्याय की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाता है।










