भारतीय क्रिकेट टीम में करीब 8 साल बाद वापसी करने वाले करुण नायर का इंग्लैंड दौरा बेहद निराशाजनक रहा। पांच टेस्ट मैचों की एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में उन्हें चार मुकाबलों में खेलने का मौका मिला, लेकिन वे एक भी प्रभावशाली पारी नहीं खेल सके। खराब फॉर्म और लगातार फेल होती पारियों के चलते अब उनके अंतरराष्ट्रीय टेस्ट करियर पर विराम लगने की अटकलें तेज हो गई हैं।
टीम इंडिया में लंबे इंतजार के बाद वापसी
करुण नायर ने साल 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ ही तिहरा शतक जड़कर खुद को टीम इंडिया के भविष्य के सितारे के रूप में स्थापित किया था। लेकिन इसके बाद उनका करियर ठहर सा गया। करीब 8 साल तक टीम से बाहर रहने के बाद उन्हें एक बार फिर मौका मिला। चयनकर्ताओं की नजर में वे नंबर तीन के विकल्प के तौर पर देखे जा रहे थे, लेकिन वे उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके।
पहला टेस्ट: शुरुआत में ही लड़खड़ा गए
लीड्स में खेले गए पहले टेस्ट मैच में करुण नायर को छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने भेजा गया। इस मैच की पहली पारी में वे खाता भी नहीं खोल पाए और शून्य पर आउट हो गए। दूसरी पारी में उन्होंने महज 20 रन बनाए। भारत को यह टेस्ट पांच विकेट से हारना पड़ा।
दूसरे टेस्ट में प्रमोशन का फायदा नहीं
एजबेस्टन में खेले गए दूसरे टेस्ट में उन्हें नंबर तीन पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया। यह वह पोजिशन थी जिसे टीम में लंबे समय से भरने की जरूरत महसूस की जा रही थी। हालांकि, नायर ने पहली पारी में 31 और दूसरी पारी में 26 रन ही बनाए। इस मुकाबले में भारत की जीत तो हुई, लेकिन उसमें करुण नायर का योगदान नगण्य रहा। शुभमन गिल ने इस मैच में 400 से ज्यादा रन बनाकर टीम को शानदार जीत दिलाई।

लॉर्ड्स टेस्ट: फ्लॉप शो का सिलसिला जारी
तीसरे टेस्ट में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर भी करुण नायर की किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हुए वे पहली पारी में 40 रन और दूसरी पारी में सिर्फ 14 रन बना सके। लगातार तीन टेस्ट में असफल रहने के बाद उन्हें चौथे टेस्ट से बाहर कर दिया गया। उनकी जगह फिर से साई सुदर्शन को टीम में शामिल किया गया।
आखिरी टेस्ट में आखिरी मौका?
ओवल में खेले गए सीरीज के आखिरी टेस्ट में करुण नायर को एक और मौका मिला। इस बार उन्हें नंबर पांच पर बल्लेबाजी करने भेजा गया। पहली पारी में उन्होंने 57 रन बनाए—जो इस सीरीज में उनका सर्वोच्च स्कोर रहा—लेकिन दूसरी पारी में एक बार फिर वे नाकाम रहे और सिर्फ 17 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इस तरह चार मैचों की आठ पारियों में वे कुल 205 रन ही बना सके, वो भी 25.62 की औसत से।
क्या करियर का अंत?
करुण नायर जैसे अनुभवी बल्लेबाज से जिस निरंतरता और संयम की अपेक्षा थी, वह इस सीरीज में कहीं नजर नहीं आई। तकनीकी खामियों और आत्मविश्वास की कमी साफ दिखी। चयनकर्ताओं के लिए अब नायर को टेस्ट टीम में बनाए रखना मुश्किल हो सकता है, खासकर तब जब युवा बल्लेबाज लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और विकल्पों की कोई कमी नहीं है।
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करुण नायर की टेस्ट में वापसी एक बड़े मौके की तरह थी, लेकिन वे इस मौके को भुना नहीं सके। सीरीज में मिले अवसरों के बावजूद वे टीम के भरोसे पर खरे नहीं उतर सके। अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि इंग्लैंड दौरे के साथ उनका टेस्ट करियर भी खत्म हो सकता है। अगर उन्हें दोबारा मौका चाहिए, तो घरेलू क्रिकेट में खुद को पूरी तरह साबित करना होगा