बाबा श्याम की प्रसिद्धि से देशभर में पहचान बना चुके खाटूश्यामजी कस्बे में अब सरकारी जमीनों पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। गोचर भूमि, सवाई चक और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों पर वर्षों से जारी अवैध कब्जा अब बेकाबू होता नजर आ रहा है। लोगों द्वारा कच्चे-पक्के निर्माण किए जाने के साथ ही कई स्थानों पर खेती भी शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, कस्बे की लगभग 30 प्रतिशत से अधिक सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है। इस बढ़ते कब्जे पर न तो नगरपालिका सक्रिय है और न ही प्रशासन कोई ठोस कदम उठा पा रहा है।
बिजली विभाग की संदिग्ध भूमिका
सरकारी जमीन पर हो रहे अतिक्रमण को और भी गंभीर बनाता है विद्युत विभाग का ढुलमुल रवैया। पिछले जिला कलक्टरों और वर्तमान अधिकारियों के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद अवैध कब्जाधारियों को बिजली कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं।
जब इस पर सहायक अभियंता राकेश महला से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “कनेक्शन क्षतिपूर्ति बंद पत्र के आधार पर दिया गया है। किसी को सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता।” यह तर्क कई स्थानीय निवासियों के गले नहीं उतर रहा है, खासकर तब, जब रींगस और दांता रोड जैसे क्षेत्रों में पूर्व में ऐसे ही कनेक्शन प्रशासन के हस्तक्षेप से काटे जा चुके हैं।

विकास योजनाओं पर पड़ा असर
अतिक्रमण की वजह से कई विकास योजनाएं अटकने की कगार पर पहुंच गई हैं।
रींगस रोड पर स्थित 52 बीघा की सरकारी पार्किंग भूमि, पीडब्ल्यूडी मोड़, सांवलपुरा रोड और मंढा रोड जैसे क्षेत्रों में किसान सेवा केंद्र के आसपास तक अवैध कब्जे फैल चुके हैं। इससे भविष्य में क्षेत्रीय विकास व यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
कृषि पर्यवेक्षक सुवाराम महला ने मंढा रोड पर किसान सेवा केंद्र के पास अतिक्रमण हटवाने के लिए नगरपालिका ईओ को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा, अतिक्रमण की गति और तेज हो गई है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
एसडीएम मोनिका सामोर ने कहा कि प्रशासन पूरे मामले की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र ही कार्रवाई करेगा। साथ ही, अवैध बिजली कनेक्शनों के मामले में भी विद्युत विभाग से जवाब-तलबी की जाएगी।
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खाटूश्यामजी में बेशकीमती सरकारी जमीनों पर हो रहा अतिक्रमण केवल भूमि हड़पने की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट तंत्र की एक गंभीर तस्वीर भी पेश करता है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह धार्मिक नगरी भविष्य में शहरी अव्यवस्थाओं का केंद्र बन सकती है।