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थाना प्रभारी रूपेश दुबे ने खाया जहर, आत्महत्या की कोशिश से पुलिस विभाग में हड़कंप

भोपाल (मध्य प्रदेश)।
राजधानी भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। निशातपुरा थाने के प्रभारी निरीक्षक (टीआई) रूपेश दुबे ने रविवार रात ड्यूटी से घर लौटने के बाद जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या की कोशिश की। उनकी हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है, और फिलहाल उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

ड्यूटी के बाद घर लौटते ही उठाया खौफनाक कदम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रूपेश दुबे रविवार देर शाम थाने से ड्यूटी पूरी कर अपने घर लौटे। उनका निवास द्वारकानगर क्षेत्र में स्थित है। घर पहुंचते ही उन्होंने किसी जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया, जिससे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
परिजनों ने उनकी हालत गंभीर होते देख तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

डॉक्टरों ने बताया गंभीर, 24 घंटे क्रिटिकल

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, रूपेश दुबे की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। डॉक्टर्स की एक विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। जहर का प्रकार और शरीर पर उसका असर कितना गहरा है, इसकी जांच की जा रही है।
फिलहाल 24 से 48 घंटे उनके लिए बेहद अहम बताए जा रहे हैं।

पुलिस विभाग में मचा हड़कंप, वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे अस्पताल

जैसे ही इस घटना की खबर पुलिस महकमे में फैली, पूरे विभाग में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तत्काल अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायज़ा लिया।
रूपेश दुबे के सहकर्मियों और परिजनों से बातचीत की जा रही है ताकि आत्महत्या की वजहों का पता लगाया जा सके।
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “टीआई दुबे एक कर्तव्यनिष्ठ और शांत स्वभाव के अधिकारी माने जाते थे, यह घटना बेहद अप्रत्याशित है।”

पारिवारिक तनाव हो सकता है वजह, लेकिन पुष्टि नहीं

घटनास्थल और अस्पताल में मौजूद सूत्रों की मानें तो आत्महत्या के पीछे पारिवारिक तनाव की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि, अब तक किसी भी पुलिस अधिकारी ने इस बात की औपचारिक पुष्टि नहीं की है।
मामले की गहन जांच के लिए संबंधित दस्तावेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और पारिवारिक परिस्थितियों की समीक्षा की जा रही है।

कोई सुसाइड नोट नहीं मिला

अभी तक पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। न ही रूपेश दुबे ने इस कदम को उठाने से पहले किसी को कोई सूचना दी। इससे मामला और भी रहस्यमय हो गया है।
पुलिस विभाग इस बात को लेकर भी चिंतित है कि कहीं ड्यूटी संबंधी तनाव, विभागीय दबाव या अन्य व्यक्तिगत कारण इस आत्मघाती कदम की वजह न हो।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उठे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर पुलिसकर्मियों की मानसिक स्थिति और तनाव प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिसकर्मियों को अक्सर अत्यधिक मानसिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है, जिसकी अनदेखी करना घातक हो सकता है।
हाल ही में देशभर में हुई ऐसी घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि अब समय आ गया है जब पुलिस विभाग को अपने स्टाफ की मानसिक सेहत पर गंभीरता से काम करना होगा।

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भोपाल के थाना प्रभारी रूपेश दुबे की आत्महत्या की कोशिश ने पुलिस महकमे और पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।
मामले की जांच जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि वे जल्द स्वस्थ होंगे और इस घटना के पीछे की सच्चाई भी सामने आएगी।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि मानसिक तनाव और व्यक्तिगत परेशानियों को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है।

भाजपा विधायक के साले पर बलात्कार का आरोप, पहले से है 97 करोड़ की धोखाधड़ी में जेल में बंद

मध्यप्रदेश के भिंड जिले में भाजपा विधायक अंबरीश शर्मा के साले सुधांशु द्विवेदी उर्फ भैयाजी पर एक महिला ने बलात्कार का गंभीर आरोप लगाया है। महिला थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार, मारपीट और जान से मारने की धमकी की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
बता दें कि आरोपी पहले ही मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में 97 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में न्यायिक हिरासत में बंद है।

3 साल पहले हुआ था परिचय

ग्वालियर निवासी 35 वर्षीय पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने लिखित आवेदन में बताया कि वह अपने पति से अलग रह रही है और तीन बच्चों की मां है।
करीब तीन साल पहले एक शादी समारोह के दौरान उसकी मुलाकात सुधांशु द्विवेदी से हुई थी। आरोपी ने उसकी आर्थिक स्थिति देखकर नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया था।
इसके बाद दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ।

“नौकरी के नाम पर बुलाया, नशा देकर किया रेप”

महिला के अनुसार, 22 मार्च को आरोपी ने फोन कर उसे बताया कि नौकरी का इंतजाम हो गया है और लहार (भिंड) आने को कहा।
23 मार्च को महिला लहार पहुंची, जहाँ आरोपी खुद उसे बस स्टैंड से किसी अज्ञात घर ले गया।
महिला का आरोप है कि वहां उसे नशे की चीज (डंठा) पिलाई गई जिससे वह बेसुध हो गई और उसी दौरान आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
इसके बाद आरोपी के एक सहयोगी रवि ने उसे धमकी दी कि यदि उसने किसी से कुछ कहा तो उसे जान से मार दिया जाएगा।

डर से चुप रही, अब जेल में होने की खबर से हिम्मत जुटाई

महिला ने कहा कि उस समय वह आरोपियों की धमकी से डर गई थी, इसलिए रिपोर्ट दर्ज नहीं करवा पाई।
हाल ही में जब उसे यह जानकारी मिली कि सुधांशु द्विवेदी ऑर्थर रोड जेल में बंद है, तब जाकर उसने 14 जुलाई को महिला थाना भिंड में पूरी घटना की शिकायत दी।

आरोपी पर पहले से धोखाधड़ी का केस

गौरतलब है कि आरोपी सुधांशु द्विवेदी अनाज व्यापार के नाम पर 97 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पहले से ही ऑर्थर रोड जेल में बंद है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह इस घोटाले का मुख्य आरोपी है और पुलिस द्वारा लंबे समय से उसकी निगरानी की जा रही थी।

भाजपा विधायक से पारिवारिक संबंधों के चलते मामला संवेदनशील

सुधांशु द्विवेदी लहार से भाजपा विधायक अंबरीश शर्मा का साला है।
इस वजह से यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील हो गया है।
हालांकि विधायक की ओर से अभी तक इस मामले में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पुलिस ने शुरू की जांच

भिंड महिला थाना प्रभारी क्रांति राजपूत ने पुष्टि की है कि पीड़िता की शिकायत पर बलात्कार, धमकी और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
मामले की जांच की जा रही है और पीड़िता के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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यह मामला न केवल अपराध और महिला सुरक्षा से जुड़ा है बल्कि इससे राजनीति और सत्ता से जुड़े प्रभावों की जटिलताएं भी सामने आ रही हैं।
पुलिस पर निष्पक्ष जांच का दबाव है, वहीं राजनीतिक हलकों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।

आंध्र प्रदेश में 3,500 करोड़ के शराब घोटाले में घिरते पूर्व CM जगन मोहन रेड्डी, SIT की चार्जशीट में नाम लेकिन आरोपी नहीं

आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। राज्य में हुए 3,500 करोड़ रुपये के शराब घोटाले की जांच अब अपने निर्णायक मोड़ पर है और इसमें पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी का नाम आने से राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। विशेष जांच दल (SIT) ने इस घोटाले की प्रारंभिक चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री का नाम रिश्वत लेने वालों की सूची में शामिल है। हालांकि, अभी उन्हें औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया गया है।

क्या है मामला?

SIT द्वारा दायर 305 पन्नों की चार्जशीट में बताया गया है कि वाईएसआरसीपी शासन के दौरान राज्य की आबकारी नीति में बड़े स्तर पर हेराफेरी कर हर महीने शराब कंपनियों से 50-60 करोड़ रुपये तक की रिश्वत वसूली जाती थी। यह रकम विभिन्न फर्जी कंपनियों और सहयोगियों के जरिए कथित तौर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनके करीबी सलाहकारों तक पहुंचाई जाती थी।

चार्जशीट में इस रिश्वतखोरी नेटवर्क का मास्टरमाइंड मुख्यमंत्री के सलाहकार राज केसिरेड्डी उर्फ केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी को बताया गया है। उन्हें आरोपी नंबर 1 बनाया गया है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि इस नेटवर्क ने नकद, सोने और विदेशों में संपत्तियों के रूप में अवैध रूप से धन एकत्र किया।

SIT का दावा और कोर्ट की स्थिति

SIT के अनुसार, यह पूरा घोटाला एक संगठित आपराधिक नेटवर्क के रूप में काम करता था। आरोपी अधिकारियों ने ऑटोमैटिक ऑर्डर फॉर सप्लाई (OFS) सिस्टम को खत्म कर मैन्युअल सप्लाई व्यवस्था लागू की, जिससे रिश्वतखोरी को बढ़ावा मिला।

हालांकि, अदालत ने अभी तक चार्जशीट पर औपचारिक संज्ञान नहीं लिया है। SIT ने यह भी जानकारी दी है कि 20 दिनों के भीतर एक और चार्जशीट दाखिल की जाएगी, जिसमें और भी नाम सामने आ सकते हैं।

अब तक की कार्रवाई

अब तक इस मामले में SIT ने:

  • 62 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की है।
  • 268 गवाहों से पूछताछ की है।
  • 48 कंपनियों और व्यक्तियों को आरोपी बनाया है (अभी 16 का नाम चार्जशीट में)।
  • YSRCP सांसद पी. वी. मिधुन रेड्डी को गिरफ्तार किया है, जिन्हें SIT ने मुख्य साजिशकर्ता बताया है।

चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि 300 करोड़ रुपये की अवैध रकम का उपयोग YSRCP के चुनाव प्रचार में किया गया और यह रकम दुबई व अफ्रीका में संपत्ति खरीदने में लगाई गई।

विपक्ष और जगन की प्रतिक्रिया

TDP के नेतृत्व वाली नई सरकार ने इस घोटाले को उजागर करने के लिए SIT का गठन किया था। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने इस पूरे मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। उन्होंने कहा कि यह एक झूठी कहानी है जिसे जनता का ध्यान भटकाने के लिए फैलाया जा रहा है। उन्होंने मिधुन रेड्डी की गिरफ्तारी को अन्यायपूर्ण बताया और कहा कि यह विपक्ष को डराने की साजिश है।

आगे क्या?

अब सभी की निगाहें अदालत की अगली कार्रवाई पर हैं। यदि आने वाली चार्जशीट में जगन मोहन रेड्डी को औपचारिक रूप से आरोपी बनाया जाता है, तो यह न केवल YSRCP की साख पर गंभीर असर डालेगा, बल्कि आंध्र प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर भी ला सकता है।.

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यह घोटाला आने वाले समय में राज्य की राजनीति और प्रशासनिक छवि पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। खासतौर पर ऐसे समय में जब विपक्ष सरकार पर जवाबदेही और पारदर्शिता के सवालों को लेकर हमलावर है।

राजस्थान में सोशल मीडिया पर ‘मुख्यमंत्री लापता’ ट्रेंड, बेरोजगारी को लेकर भड़का युवाओं का गुस्सा

राजस्थान में एक बार फिर युवाओं की बेरोजगारी को लेकर नाराजगी सामने आई है, लेकिन इस बार विरोध का तरीका थोड़ा अलग है। सोशल मीडिया पर #CM_Lapata और #Berozgari_Par_CM_Khamosh जैसे हैशटैग्स ट्रेंड कर रहे हैं और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की “लापता” बताकर खोज की जा रही है। प्रदेशभर में पोस्टर लगाकर यह आरोप लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री केवल मंदिरों में पूजा-पाठ और फोटो खिंचवाने में व्यस्त हैं, जबकि युवाओं की समस्याएं लगातार अनसुनी हो रही हैं।

मंदिरों में दिखते मुख्यमंत्री, बेरोजगारों की सुनवाई नहीं?

पिछले कुछ हफ्तों से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना करते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। इन तस्वीरों को लेकर ही युवाओं और बेरोजगार संगठनों ने तंज कसना शुरू किया। पोस्टरों में लिखा गया –
“मुख्यमंत्री लापता हैं, यदि कहीं दिखें तो हमें सूचित करें। वे केवल मंदिरों में दिखते हैं, सचिवालय में नहीं।”

युवाओं का कहना है कि प्रदेश में सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया ठप पड़ी है, कई परीक्षाएं रद्द हुई हैं, कुछ में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं और नई वैकेंसी की कोई सूचना नहीं है। बावजूद इसके सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह से मौन है।

सोशल मीडिया से उठी आवाज़, हुआ प्रदेशव्यापी असर

इस विरोध को सोशल मीडिया ने एक व्यापक जनसहभागिता का रूप दे दिया है। ट्विटर (अब X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों युवा #CM_Lapata हैशटैग के साथ अपने गुस्से का इज़हार कर रहे हैं। कई जगहों पर युवाओं ने मुख्यमंत्री के “लापता” पोस्टर लगाकर प्रतीकात्मक विरोध जताया है।

छात्र संगठन NSUI, RJSA और बेरोजगार अभ्यर्थियों के विभिन्न समूहों ने कहा कि राज्य में गंभीर बेरोजगारी संकट है, लेकिन मुख्यमंत्री का ध्यान केवल धार्मिक कार्यक्रमों में है। यह ट्रेंड अब सिर्फ ऑनलाइन नहीं, बल्कि जमीन पर भी आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।

विपक्ष ने भी बोला हमला

विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने इस मौके पर सत्ताधारी भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस नेता ने कहा,

“मुख्यमंत्री केवल पूजा-पाठ में व्यस्त हैं, सचिवालय में न तो उनकी मौजूदगी होती है और न ही युवाओं के सवालों पर चर्चा। अगर ऐसी ही बेरुखी रही तो जनता जवाब देने में देर नहीं करेगी।”

कई पूर्व मंत्रियों और विपक्षी विधायकों ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री से बेरोजगारी पर स्पष्टीकरण की मांग की है।

सरकारी प्रतिक्रिया का इंतजार

इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। न ही रोजगार से जुड़ी किसी नई योजना या परीक्षा शेड्यूल पर कोई घोषणा हुई है। इससे युवाओं में निराशा और बढ़ रही है।

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राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह विरोध यूं ही बढ़ता रहा, तो यह सरकार के लिए आने वाले दिनों में राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है।
विशेषकर तब, जब राज्य में आने वाले महीनों में स्थानीय निकाय चुनाव या अन्य जनचुनाव प्रस्तावित हों।

नाराज़गी का नया तरीका

मुख्यमंत्री लापता हैं” जैसा तंज युवाओं की उस गहराती नाराज़गी को दिखाता है, जो लंबे समय से नौकरी, भर्ती, परीक्षा और भविष्य को लेकर अनसुनी रही है। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह विरोध, अब धीरे-धीरे सड़कों तक पहुंचने की तैयारी में है। यदि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं निकाला, तो यह नाराज़गी जन आंदोलन का रूप ले सकती है।

भोपाल-सागर हाईवे के 6 में से दो खंडों में तेजी से कार्य, मोरीकोड़ी-विदिशा मार्ग का 85% निर्माण पूरा

मध्यप्रदेश में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में एक और अहम कदम तेजी से आगे बढ़ रहा है। राजधानी भोपाल को सागर से जोड़ने वाले भोपाल-सागर हाईवे का निर्माण कार्य जोरों पर है। यह हाईवे छह खंडों में विभाजित कर बनाया जा रहा है, जिनमें से मोरीकोड़ी से विदिशा तक के खंड का निर्माण लगभग 85 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। उम्मीद की जा रही है कि नए साल की शुरुआत में इस रूट पर यातायात शुरू हो जाएगा।

छह हिस्सों में बंटा हाईवे प्रोजेक्ट

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा इस हाईवे को छह अलग-अलग टुकड़ों में बांटकर निर्माण की योजना बनाई गई है, ताकि प्रत्येक चरण पर निगरानी और गति दोनों बनाए रखी जा सके। वर्तमान में दो खंडों पर कार्य प्रगति पर है, जबकि तीन खंडों में कार्य जल्द शुरू होने वाला है, जिसके लिए निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और तीन नई ठेका कंपनियों के साथ अनुबंध कर लिया गया है।

कहां-कहां हो रहा काम?

परियोजना निदेशक सिद्धांत सिंघई के अनुसार:

  • खंड-1: मोरीकोड़ी से विदिशा – 85% कार्य पूर्ण, जनवरी तक खुलने की संभावना।
  • खंड-2: विदिशा से ग्यारसपुर – अक्टूबर से कार्य शुरू।
  • खंड-3: ग्यारसपुर से राहतगढ़ – अक्टूबर से कार्य शुरू।
  • खंड-4: राहतगढ़ से बेरखेड़ी – अक्टूबर से कार्य शुरू।
  • खंड-5: बेरखेड़ी से सागर – कार्य जल्द शुरू होने की प्रक्रिया में।
  • खंड-6: बेरखेड़ी से सागर लिंक रोड – निर्माण लगभग पूर्ण।

इस पूरे प्रोजेक्ट के शेष तीन खंडों पर करीब 1210 करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह निवेश राज्य के सड़क ढांचे को मजबूती देगा और भोपाल-सागर जैसे दो प्रमुख शहरों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर से जोड़ेगा।

यात्रियों के लिए क्या होंगे फायदे?

इस हाईवे के तैयार हो जाने से राजधानी भोपाल और बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रमुख शहर सागर के बीच की दूरी कम समय में तय की जा सकेगी। अभी जहां यह सफर करीब 4.5 से 5 घंटे का है, वहां इस हाईवे के बाद यह घटकर 3 घंटे से भी कम हो सकता है। इससे व्यापारिक आवागमन, मेडिकल इमरजेंसी, शिक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी काफी सुधार आने की संभावना है।

विकास के नए रास्ते खुलेंगे

भोपाल-सागर हाईवे न केवल दो शहरों को जोड़ेगा, बल्कि रायसेन, विदिशा, ग्यारसपुर, राहतगढ़, बेरखेड़ी जैसे छोटे और मध्यम शहरों को भी इससे फायदा मिलेगा। इन शहरों में स्थानीय उद्योगों, कृषि व्यापार, और आवागमन को भी नई गति मिलेगी।

सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर फोकस

एनएचएआई के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जा रहा है। हाईवे पर फोरलेन मार्ग, सुरक्षित साइड बेरियर, अंडरपास और फ्लाईओवर का निर्माण सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे हादसों की आशंका को कम किया जा सके।

सरकार की प्राथमिकता में इन्फ्रास्ट्रक्चर

राज्य सरकार इस समय सड़क और संपर्क व्यवस्था को प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रदेश का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब हर गांव, शहर और क्षेत्र को बेहतर सड़क मार्गों से जोड़ा जाए।

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भोपाल-सागर हाईवे का यह प्रोजेक्ट न केवल दो बड़े शहरों को जोड़ने वाला रास्ता है, बल्कि यह प्रदेश के विकास का इंजन भी बन सकता है। जैसे-जैसे खंडों का कार्य पूरा होगा, वैसे-वैसे मध्यप्रदेश के आम नागरिकों को तेज, सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिलेगा।

छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर छात्र संगठन NSUI का अनोखा विरोध, खून से लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

राज्य में छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर छात्र संगठनों का आक्रोश दिन-ब-दिन तेज होता जा रहा है। शनिवार को राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) के बैनर तले छात्रों ने अनोखे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराते हुए एक मौन रैली निकाली और मुख्यमंत्री के नाम खून से लिखा गया पत्र कॉलेज प्रशासन को सौंपा।

यह विरोध प्रदर्शन बीकानेर स्थित आरआर कॉलेज सर्किल से शुरू होकर कॉलेज परिसर तक गया, जहां छात्रों ने आंखों पर काली पट्टी बांधकर मौन रैली निकाली। काली पट्टी यह संदेश दे रही थी कि राज्य की सरकार युवाओं की आवाज़ नहीं सुन रही है और लोकतंत्र की पहली सीढ़ी — छात्रसंघ चुनाव — को जानबूझ कर नजरअंदाज किया जा रहा है।

राजनीति की पहली पाठशाला बंद क्यों?

एनएसयूआई के छात्र नेताओं का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि राजनीति की पहली पाठशाला है। यह युवाओं को नेतृत्व के लिए तैयार करता है, जहां वे विचार-विमर्श, संगठनात्मक क्षमता और जनप्रतिनिधित्व जैसे मूल्यों को आत्मसात करते हैं। छात्रों ने कहा कि यदि सरकार लोकतंत्र को मजबूत बनाना चाहती है, तो उसे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों को अनिवार्य रूप से फिर से शुरू करना चाहिए।

खून से लिखा पत्र, भावनाओं का इज़हार

प्रदर्शन का सबसे भावनात्मक पहलू तब सामने आया जब छात्रों ने कॉलेज प्राचार्य को मुख्यमंत्री के नाम खून से लिखा पत्र सौंपा। इस पत्र में छात्रों ने लिखा:

“छात्रसंघ चुनाव युवाओं के नेतृत्व विकास का आधार हैं। यह हमें लोकतंत्र की मूल भावना से जोड़ता है। यदि इन्हें रोका गया, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर होगी। हमारी यही मांग है कि छात्रसंघ चुनाव तत्काल प्रभाव से बहाल किए जाएं।”

छात्रों ने इस पत्र के माध्यम से सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की कि अब यह केवल राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि युवाओं के अस्तित्व और भविष्य की लड़ाई बन चुकी है।

सरकार को चेतावनी: आंदोलन और तेज होगा

एनएसयूआई के नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं किए गए, तो राज्य भर में आंदोलन तेज किया जाएगा। इसके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में धरने, प्रदर्शन, कक्षाओं का बहिष्कार और प्रशासनिक घेराव जैसी रणनीतियों को अपनाया जाएगा।

छात्रों की मांगें क्या हैं?

छात्रों द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • राज्य के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव तत्काल प्रभाव से कराए जाएं।
  • सरकार चुनावों में किसी प्रकार की राजनीतिक हस्तक्षेप न करे।
  • छात्र प्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी दी जाए।

लोकतंत्र की असली परीक्षा

यह विरोध केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक लोकतांत्रिक अधिकार के संरक्षण की लड़ाई भी है। छात्रसंघ चुनावों के माध्यम से युवाओं को न केवल नेतृत्व का मौका मिलता है, बल्कि वे जनभावनाओं को समझने और सार्वजनिक जीवन में उतरने की दिशा में पहला कदम भी उठाते हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्रदर्शन के दौरान कॉलेज प्रशासन शांत रहा, लेकिन उन्होंने छात्रों की भावनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री को पत्र पहुंचाने का आश्वासन दिया है। अभी तक राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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राज्य में छात्रसंघ चुनावों को लेकर छात्र संगठनों का आंदोलन धीरे-धीरे एक राजनीतिक जनांदोलन का रूप लेता जा रहा है। यदि सरकार ने समय रहते ठोस पहल नहीं की, तो यह आंदोलन युवाओं की शक्ति का बड़ा उदाहरण बन सकता है।

भारतीय पायलट महासंघ ने WSJ और Reuters पर कानूनी कार्रवाई की घोषणा की — ‘मृत पायलटों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई’

नई दिल्ली।
भारतीय पायलट महासंघ (Federation of Indian Pilots – FIP) ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) और Reuters के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। यह कदम अहमदाबाद प्लेन क्रैश को लेकर प्रकाशित की गई उन रिपोर्टों के विरोध में उठाया गया है, जिनमें मृत पायलट को दुर्घटना के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया था। एफआईपी का कहना है कि यह रिपोर्टिंग न केवल आधारहीन है, बल्कि इससे उन पायलटों की छवि को भी गहरी ठेस पहुंची है जो अब अपना पक्ष रखने के लिए जीवित नहीं हैं।

रिपोर्ट पर आपत्ति, माफी की मांग

FIP ने WSJ और Reuters को कानूनी नोटिस भेजते हुए औपचारिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। FIP का आरोप है कि इन संस्थानों ने जांच पूरी होने से पहले ही अटकलों के आधार पर रिपोर्टिंग की है, जिससे मृत पायलटों की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंची है। महासंघ ने कहा है कि जब जांच अभी जारी है, तब ऐसे समय में किसी पायलट को दोषी ठहराना न केवल अनैतिक और गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह मीडिया की नैतिकता के भी खिलाफ है।

‘पायलट नहीं दे सकते जवाब, परिवारों को ठेस’

एफआईपी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस तरह की रिपोर्टिंग न केवल पायलट समुदाय के मनोबल को गिराने वाली है, बल्कि शोक संतप्त परिवारों के लिए भी यह एक अतिरिक्त मानसिक आघात है। महासंघ ने कहा,

“मृतक पायलट अपना पक्ष रखने के लिए मौजूद नहीं हैं। ऐसे में उनकी छवि पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है।”

एफआईपी ने मीडिया संस्थानों से आग्रह किया है कि वे जांच पूरी होने तक संयम बरतें और गैर-पुष्ट सूचनाओं का प्रकाशन न करें

अमेरिकी एजेंसी ने भी जताई नाराज़गी

इस विवाद में अब अमेरिका की राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) की प्रमुख जेनिफर होमेंडी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने WSJ और Reuters की रिपोर्टिंग को “अटकलों पर आधारित” बताया और कहा कि

“इस तरह की गंभीर घटनाओं पर रिपोर्टिंग करते समय मीडिया को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी सिर्फ प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की गई है और इस तरह की जांचों में समय लगता है। ऐसे में मीडिया को धैर्य और जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए।

AAIB ने मीडिया रिपोर्टों को खारिज किया

भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने हाल ही में प्लेन क्रैश की प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 के टेक-ऑफ के कुछ समय बाद ही फ्यूल स्विच ऑफ हो गया था, जिससे इंजन तक ईंधन नहीं पहुंच पाया। यह भी सामने आया कि कॉकपिट में मौजूद दोनों पायलटों के बीच इस संबंध में भ्रम और संवाद की कमी थी।

रिपोर्ट में एक पायलट द्वारा दूसरे से पूछे गए सवाल का जिक्र है — “आपने इंजन फ्यूल क्यों बंद किया?” और जवाब आया — “मैंने कुछ नहीं किया।”

हालांकि, AAIB ने साफ किया कि जांच अभी जारी है और किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। एजेंसी ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी असत्य बताया है, जिनमें दुर्घटना के लिए सीधे तौर पर पायलट को जिम्मेदार ठहराया गया था।

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अहमदाबाद विमान दुर्घटना के बाद उठे मीडिया विवाद में अब पायलट संगठन भी खुलकर सामने आ गए हैं। FIP द्वारा WSJ और Reuters पर की गई कानूनी कार्रवाई ने पत्रकारिता की जवाबदेही और जांच के प्रति संवेदनशीलता जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि ये अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान इस नोटिस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, और क्या वे अपनी रिपोर्ट को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हैं।

कलेक्टर के औचक निरीक्षण में खुली सरकारी कार्यालयों की पोल: अफसरों की झूठी हाज़िरी पकड़ी गई, कई कर्मचारी गैरहाज़िर

बालाघाट
जिले के प्रशासनिक तंत्र में लापरवाही और अनुशासनहीनता पर नकेल कसते हुए कलेक्टर मृणाल मीणा ने शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान न केवल कर्मचारियों की गैरहाज़िरी सामने आई, बल्कि एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कलेक्टर को गुमराह करने की कोशिश भी उजागर हो गई। इस निरीक्षण ने जिले में सरकारी कार्यप्रणाली की जमीनी सच्चाई को सामने ला दिया।

सबसे चौंकाने वाला वाकया तब हुआ जब कलेक्टर मीणा सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक (DPC) कार्यालय पहुंचे। वहां डीपीसी जीपी बर्मन की कुर्सी खाली थी, लेकिन उनके कंप्यूटर में ई-ऑफिस लॉगिन चालू था। शक होने पर कलेक्टर ने उन्हें कॉल किया और पूछा, “कहां हो?” बर्मन ने जवाब दिया, “सर, मैं कार्यालय में ही हूं।” इस पर कलेक्टर बोले, “मैं भी कार्यालय में हूं, लेकिन आप नहीं दिख रहे।” इस संवाद ने अफसर की झूठी उपस्थिति की पोल खोल दी।

कुछ ही देर बाद जब कलेक्टर कार्यालय से निकलने लगे, तब डीपीसी बर्मन वहां पहुंचे, लेकिन तब तक उनका झूठ पकड़ा जा चुका था। इस घटना के बाद कलेक्टर ने वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति भी जांची। इस दौरान विवेक गुप्ता, योगेश बिसेन, श्रीश थानथराटे, दिनेश गौतम, आकाश वल्के, भाकचंद पारधी और दीपक सौरकुड़े कार्यालय से नदारद पाए गए। इन सभी का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए हैं।

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में 100% पाठ्य-पुस्तकें बांटने का जो दावा किया गया था, वह झूठा और भ्रामक था। कार्यालय में बड़ी मात्रा में किताबें पड़ी मिलीं, जबकि डीपीसी बर्मन ने पहले दिन स्कूलों में पूरा वितरण होने की जानकारी दी थी। इससे साफ हुआ कि बैठकों में भी अधिकारियों द्वारा गलत रिपोर्टिंग की जा रही है।

अन्य कार्यालयों में भी मिली अनियमितता

सहायक संचालक उद्यान विभाग, लोक निर्माण विभाग और जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के निरीक्षण में भी कई अफसर गैरहाज़िर पाए गए। सहायक संचालक क्षितिज कराड़े वीडियो कॉन्फ्रेंस में थे, लेकिन उनके विभाग के अन्य अधिकारी सीपी नारनौरे, जितेंद्र वनवासी और संध्या इनवाती अनुपस्थित पाए गए। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री अड़मे भी निरीक्षण के समय मौजूद नहीं थे। यहां कार्यालय की अव्यवस्था और अस्वच्छता पर भी कलेक्टर ने नाराज़गी जताई।

उद्योग कार्यालय में भी लापरवाही

जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र में निरीक्षण के दौरान प्रबंधक गजभिए की उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर नहीं थे, और महाप्रबंधक प्रीति मर्सकोले, वीणा चौहान और रागिनी ठाकुर भी गायब मिले। यहां एक कक्ष में कबाड़ जमा मिला और साफ-सफाई बेहद खराब स्थिति में थी।

कलेक्टर के निर्देश और सख्त रुख

कलेक्टर मृणाल मीणा ने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी नियमित रूप से उपस्थिति दर्ज करें, कार्यालय साफ-सुथरे और व्यवस्थित रखे जाएं तथा निवेश प्रोत्साहन कक्ष को बेहतर बनाया जाए। साथ ही लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निपटारा हो और विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए।

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इस पूरे औचक निरीक्षण ने साफ कर दिया कि बालाघाट जिले में कई विभागों में कार्य अनुशासन की कमी, झूठी रिपोर्टिंग, और कर्मचारियों की गैर-हाजिरी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। कलेक्टर की इस सख्त कार्रवाई की जनता और प्रशासनिक हलकों में जमकर सराहना हो रही है। यह पहल भविष्य में प्रशासन को अधिक जवाबदेह और अनुशासित बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

सिंगरौली में सड़क हादसे के बाद बवाल: आदिवासी वृद्ध की मौत पर परिजनों ने गोड़बहरा में किया चक्काजाम

सिंगरौली (म.प्र.)
जिले के सरई थाना क्षेत्र अंतर्गत गोड़बहरा गांव में बीते मंगलवार शाम हुए सड़क हादसे में घायल आदिवासी वृद्ध की ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे से गुस्साए परिजनों ने बुधवार सुबह शव को गोड़बहरा की सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

क्या है मामला?

जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम करीब 5:00 बजे गोड़बहरा में मोटरसाइकिल और साइकिल की आमने-सामने भिड़ंत हो गई थी। इस हादसे में साइकिल सवार आदिवासी वृद्ध, निवासी तेन्दूहा, गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरई में भर्ती कराया गया, लेकिन स्थिति नाजुक होने के कारण उन्हें वहां से जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर रेफर किया गया था।

इलाज के दौरान सुबह हुई मौत

रातभर इलाज के बाद बुधवार सुबह वृद्ध ने दम तोड़ दिया। जैसे ही यह खबर गांव में पहुंची, परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने शव को लेकर घटना स्थल गोड़बहरा के मुख्य मार्ग पर रख दिया और सड़क को जाम कर दिया।

परिजनों ने लगाया जानबूझकर टक्कर मारने का आरोप

गुस्साए परिजनों ने आरोप लगाया कि यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं थी, बल्कि मोटरसाइकिल सवार युवक ने जानबूझकर वृद्ध को टक्कर मारी है। परिजनों ने दोषी युवक की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की।

यातायात ठप, प्रशासन मौके पर

चक्काजाम के कारण गोड़बहरा-सरई मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मौके पर सरई थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी पहुंचे और परिजनों से बात कर स्थिति को शांत करने की कोशिश की।

प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है और परिजनों से शव का अंतिम संस्कार करने की अपील की। समाचार लिखे जाने तक पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है

आदिवासी संगठनों में भी आक्रोश

घटना को लेकर आदिवासी समाज के संगठनों में भी रोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि आदिवासियों के साथ लगातार हो रही ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं और दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

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सिंगरौली के गोड़बहरा में हुई यह दर्दनाक घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए शोक का कारण बनी है, बल्कि स्थानीय प्रशासन के लिए कानून व्यवस्था की गंभीर चुनौती बनकर सामने आई है। जरूरत है जल्द न्याय और संवेदनशीलता से मामले को सुलझाने की, ताकि पीड़ित परिवार को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सीधी-सिंगरौली एनएच-39 पर तबाही: पड़रिया जंगल में मलबा जमा, सड़क ठप – यात्रियों व व्यापार पर संकट

सीधी (म.प्र.)
मध्यप्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर सीधी-सिंगरौली राष्ट्रीय राजमार्ग-39 (एनएच-39) की पोल खोल दी है। पड़रिया के जंगल क्षेत्र में भारी बारिश के कारण जगह-जगह मलबा और पानी भर गया है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। स्थिति यह हो गई है कि दोपहिया से लेकर भारी वाहन तक सड़क पार नहीं कर पा रहे हैं, जिससे यात्रियों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।

10 साल से अधूरा निर्माण, लापरवाह तंत्र पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

स्थानीय ग्रामीणों और यात्रियों का आरोप है कि इस मार्ग का निर्माण कार्य बीते 10 वर्षों से अधूरा पड़ा है। निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, जनप्रतिनिधि और अधिकारी सभी इस मसले पर वर्षों से आंख मूंदे हुए हैं। हर साल बारिश में इस मार्ग पर भूस्खलन और जलभराव की स्थिति बन जाती है, लेकिन शासन-प्रशासन इस पर कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया।

ग्रामीणों का कहना है कि वे हर साल जान जोखिम में डालकर इसी रास्ते से यात्रा करते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। सांसद और विधायकों की निष्क्रियता को लेकर लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस मार्ग की मरम्मत और स्थायी सुरक्षा दीवारों का निर्माण हुआ होता, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा बढ़ा

विशेषज्ञों के अनुसार, पड़रिया का यह क्षेत्र पहाड़ी और वनक्षेत्र से घिरा हुआ है। लगातार बारिश से यहां भूस्खलन की स्थिति गंभीर हो गई है। मिट्टी धंसने और चट्टानों के खिसकने से सड़क का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

यातायात ठप, व्यापार चौपट

एनएच-39 न केवल सीधी-सिंगरौली के लोगों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है, बल्कि यह क्षेत्र की व्यापारिक जीवन रेखा भी है। सीधी से सिंगरौली, चितरंगी, देवसर और कई औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह मार्ग ठप होने से मालवाहन गाड़ियां फंस गईं हैं। इससे न केवल व्यापार पर असर पड़ रहा है, बल्कि दवाइयां, राशन और जरूरी सामान की आपूर्ति भी बाधित हो रही है।

व्यापारियों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो कुछ ही दिनों में बाजारों में जरूरी वस्तुओं की कमी हो सकती है। स्थानीय दुकानदार और ट्रांसपोर्ट संचालक इस संकट से चिंतित हैं।

जिला प्रशासन बेखबर?

हालात इतने खराब हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ना तो जेसीबी भेजी गई, ना ही मार्ग साफ करने की कोई कवायद दिख रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक अधिकारी जागते ही नहीं।

मांग – तत्काल राहत व स्थायी समाधान

ग्रामीणों, व्यापारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि इस मार्ग पर तुरंत जेसीबी भेजकर रास्ता साफ किया जाए, और दीर्घकालिक समाधान के तहत सुरक्षा दीवार, नाली और मजबूत सड़क निर्माण कराया जाए। साथ ही ठेकेदारों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि हर साल की यह परेशानी खत्म हो सके।

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एनएच-39 का बंद होना सिर्फ एक सड़क का अवरोध नहीं, बल्कि पूरे जिले की रफ्तार थमने जैसा है। अब जरूरत है गंभीरता से हालात को देखने की, ताकि भविष्य में यह मार्ग विकास की पहचान बने, परेशानी की नहीं।