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उमरिया जिला अस्पताल में सीटी स्कैन टेक्नीशियन की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लापरवाही का लगाया आरोप

उमरिया (मध्यप्रदेश): जिले के जिला अस्पताल में सोमवार सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब सीटी स्कैन सेंटर में कार्यरत एक 25 वर्षीय युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई। मृतका की पहचान सुभांगी सिंह के रूप में हुई है, जो जिला अस्पताल परिसर में निजी कंपनी द्वारा संचालित सीटी स्कैन यूनिट में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थी।

बेहोशी की हालत में अस्पताल लाई गई, डॉक्टर ने मृत घोषित किया

जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह सुभांगी को उसके परिजन बेहोशी की हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में मौजूद ड्यूटी डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। जैसे ही यह खबर परिजनों तक पहुंची, अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। गम और आक्रोश से भरे परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

परिजनों का आरोप, मानसिक तनाव में थी युवती

परिजनों का कहना है कि सुभांगी पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में थी, हालांकि उन्होंने इसकी कोई विस्तृत वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई। कुछ परिजनों ने यह भी आशंका जताई कि सुभांगी की मौत स्वाभाविक नहीं है और यह घटना साजिश का हिस्सा हो सकती है। इस संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल चौकी प्रभारी अमर सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और उसे अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखा गया है।

चौकी प्रभारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मृतका के पास से कोई सुसाइड नोट या आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी।

क्या मौत आत्महत्या थी या कोई साजिश?

घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं —

  • क्या सुभांगी ने काम के दबाव या व्यक्तिगत कारणों से आत्महत्या जैसा कदम उठाया?
  • क्या वह किसी मानसिक या पारिवारिक तनाव में थी?
  • या फिर यह मामला किसी गहरी साजिश का हिस्सा है?

इन सवालों का जवाब अब पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल डेटा जैसे तकनीकी साक्ष्यों से सामने आ सकता है। पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की तहकीकात कर रही है।

CT स्कैन सेंटर पर भी उठे सवाल

सुभांगी जिस सीटी स्कैन यूनिट में कार्यरत थी, वह एक निजी कंपनी द्वारा संचालित है। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और उस निजी यूनिट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या सुभांगी को वहां काम के दबाव या प्रबंधन से मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा था? पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है।

स्थानीय लोगों में दहशत, महिला सुरक्षा को लेकर चिंता

घटना के बाद स्थानीय लोगों और अस्पताल स्टाफ में दहशत का माहौल है। खासकर महिला कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना देखी जा रही है। कई लोग सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

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उमरिया जिले में हुई इस संदिग्ध मौत ने सिर्फ एक युवा जीवन को खत्म नहीं किया, बल्कि कई सवालों, संदेहों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को जन्म दिया है। अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच पर टिकी हुई हैं, जो इस दुखद घटना की सच्चाई को उजागर करने का एकमात्र रास्ता है।

बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने पति पारुपल्ली कश्यप से अलग होने की घोषणा की

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भारत की बैडमिंटन स्टार और ओलंपिक मेडलिस्ट साइना नेहवाल ने अपने पति और बैडमिंटन खिलाड़ी पारुपल्ली कश्यप से अलग होने का फैसला कर लिया है। साइना ने रविवार, 13 जुलाई को अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह खबर साझा की, जिसने खेल जगत के साथ-साथ उनके प्रशंसकों को भी चौंका दिया।

सोशल मीडिया पर दी जानकारी

साइना ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा:

“कभी-कभी जिंदगी हमें अलग राहों पर ले जाती है। काफी सोच-विचार और बातचीत के बाद, मैंने और पारुपल्ली कश्यप ने अलग होने का फैसला किया है। मैं बीते पलों के लिए आभारी हूं और आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं देती हूं। कृपया इस समय हमारी निजता का सम्मान करें और समझने के लिए धन्यवाद।”

उनका यह भावुक संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कई खेलप्रेमियों व प्रशंसकों ने इस फैसले पर हैरानी जताई।

2018 में रचाई थी शादी

साइना और कश्यप ने 15 दिसंबर 2018 को हैदराबाद में शादी की थी। दोनों की मुलाकात 1997 में एक बैडमिंटन कैंप में हुई थी और फिर पुलेला गोपीचंद अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान दोनों करीब आए। लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहने के बाद, उन्होंने 2018 में शादी का फैसला लिया था। शादी में परिवार और करीबी दोस्त ही मौजूद थे, जबकि 16 दिसंबर को नोवोटेल होटल में रिसेप्शन हुआ जिसमें खेल और फिल्म जगत की कई हस्तियां शामिल हुईं।

दोनों का बैडमिंटन करियर

साइना नेहवाल ने भारत को बैडमिंटन में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

  • 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं।
  • 2015 में वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर 1 बनकर इतिहास रच दिया।
  • साइना को राजीव गांधी खेल रत्न, पद्म श्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है।

पारुपल्ली कश्यप भी पुरुष बैडमिंटन के मजबूत खिलाड़ी रहे हैं।

  • 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
  • वर्ल्ड रैंकिंग में छठे स्थान तक पहुंचे।
  • 2012 लंदन ओलंपिक में क्वार्टरफाइनल तक पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी बने।
  • उन्होंने प्रकाश पादुकोण और गोपीचंद जैसे दिग्गजों से प्रशिक्षण लिया।

प्रशंसकों को झटका

इस खबर ने बैडमिंटन प्रेमियों को हैरान कर दिया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस खबर पर दुख जताया है और दोनों के व्यक्तिगत जीवन के लिए शुभकामनाएं दी हैं। दोनों की जोड़ी को बैडमिंटन की “पावर कपल” माना जाता था, और उनका साथ हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहा।

निजता की अपील

साइना ने पोस्ट में खास तौर पर मीडिया और प्रशंसकों से उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की है। उन्होंने किसी प्रकार की गॉसिप या भ्रामक अफवाह से बचने की बात कही है।

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साइना नेहवाल और पारुपल्ली कश्यप की जुदाई भले ही निजी फैसला हो, लेकिन यह खबर भारतीय बैडमिंटन फैंस के लिए भावनात्मक झटका है। दोनों ने अपने करियर में देश का नाम रोशन किया है और आज भी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। अब जब दोनों अलग हो रहे हैं, तो देशभर से उनके नए सफर के लिए शुभकामनाएं दी जा रही हैं।

नूंह हिंसा के दो साल बाद फिर निकलेगी ब्रज मंडल यात्रा, इंटरनेट बंद, सुरक्षा चाक-चौबंद

हरियाणा के नूंह जिले में दो साल पहले हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद एक बार फिर ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। यात्रा से पहले जिले में इंटरनेट और बल्क SMS सेवाएं बंद कर दी गई हैं। प्रशासन ने रविवार रात 9 बजे से सोमवार रात 9 बजे तक के लिए यह रोक लगाई है। इसके अलावा जिले के सभी स्कूल सोमवार को बंद रखे गए हैं।

क्या है मामला?

बता दें, 2023 में इसी शोभा यात्रा के दौरान नूंह जिले में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी, जिसमें दो लोगों की मौत और कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। उस घटना की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। यात्रा से पहले सोशल मीडिया पर अफवाहों और भड़काऊ संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।

गृह विभाग का आदेश

हरियाणा गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नूंह जिले में व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और SMS जैसी सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। हालांकि, बैंकिंग और रिचार्ज जैसी आवश्यक सेवाएं चालू रहेंगी। यह रोक सिर्फ 24 घंटे के लिए है लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

बिट्टू बजरंगी को यात्रा में शामिल होने से रोका गया

प्रशासन ने विवादित गौ रक्षक बिट्टू बजरंगी को इस यात्रा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी है। यही नहीं, उसके सभी सोशल मीडिया अकाउंट भी सस्पेंड कर दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि यात्रा के दौरान कोई भी उकसाने वाली बात या उपस्थिति अप्रिय स्थिति पैदा कर सकती है।

विशेष निगरानी और भारी पुलिस बल की तैनाती

यात्रा के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2,500 से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती की जा रही है। संवेदनशील इलाकों पर खास निगरानी रखी जाएगी और सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए विशेष निगरानी टीमें बनाई गई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा को लेकर अन्य निर्देश

  • जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूल सोमवार को बंद रहेंगे।
  • ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा के मार्ग पर मौजूद मीट की सभी दुकानें बंद कर दी गई हैं।
  • ये दुकानें 24 जुलाई तक बंद रखने के आदेश में हैं ताकि यात्रा के दौरान कोई सांप्रदायिक विवाद न हो।
  • पेट्रोल पंप मालिकों को सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक खुले बर्तन में पेट्रोल/डीजल न देने की हिदायत दी गई है।

प्रशासन की अपील

प्रशासन और पुलिस ने लोगों से अपील की है कि शांति बनाए रखें और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें। सोशल मीडिया पर कोई भी भ्रामक या उकसाने वाली जानकारी न फैलाएं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

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नूंह जिले में दो साल पहले की घटना को दोहराने से रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। इंटरनेट बंदी, स्कूलों की छुट्टी, भारी पुलिस तैनाती और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी से स्पष्ट है कि सरकार किसी भी हालत में शांति भंग नहीं होने देना चाहती। हालांकि, यह देखना होगा कि यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होती है या फिर नूंह एक बार फिर अशांति की चपेट में आता है।

बिहार में 24 घंटे में 5 हत्याएं: अपराध बेलगाम, डिप्टी सीएम बोले – “ऐसी घटनाएं रोक पाना कठिन”

बिहार में बीते 24 घंटों के भीतर पांच लोगों की गोली मारकर हत्या से राज्य में सनसनी फैल गई है। मारे गए लोगों में वकील, शिक्षक, व्यवसायी, पशु चिकित्सक और किराना दुकानदार शामिल हैं। अलग-अलग जिलों में हुई इन हत्याओं के बाद एक बार फिर से कानून-व्यवस्था को लेकर बिहार सरकार कटघरे में खड़ी हो गई है।

हत्या का सिलसिला – 5 जिले, 5 लाशें

रविवार, 13 जुलाई को पटना के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में वकील जितेंद्र महतो की गोली मारकर हत्या कर दी गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वारदात थाने से महज 300 मीटर की दूरी पर हुई। वकील जितेंद्र रात के खाने के बाद टहलने निकले थे, तभी हमलावरों ने उन पर गोली चला दी।

दूसरी घटना शनिवार को सारण जिले में हुई, जहां संतोष राय नामक एक सरकारी शिक्षक को अज्ञात हमलावरों ने उनकी कार में गोली मार दी। वह घर लौट रहे थे जब यह हमला हुआ। हमलावर मुंह ढंके हुए थे और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।

तीसरी घटना सीतामढ़ी जिले की है, जहां पुटू खान नामक एक व्यवसायी को बेहद करीब से सिर में गोली मार दी गई। सीसीटीवी फुटेज सामने आया है जिसमें हमलावर पुटू खान को गोली मारते नजर आ रहे हैं। गंभीर रूप से घायल पुटू खान को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

चौथी हत्या पटना के शेखपुरा इलाके में हुई। 50 वर्षीय पशु चिकित्सक सुरेंद्र कुमार को खेत में सिंचाई के दौरान बाइक सवार बदमाशों ने गोली मार दी। घायल अवस्था में उन्हें एम्स पटना ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। सुरेंद्र भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष रह चुके हैं।

पांचवीं हत्या 11 जुलाई की शाम रामकृष्ण नगर, पटना में हुई। किराना दुकानदार विक्रम झा को दुकान के पास गोली मार दी गई। वह मौके पर ही मारे गए। अब तक इन पांचों मामलों में किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज

इन हत्याओं के बाद बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्ष के नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा है। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा –
“ताजा अपराध! बेखौफ अपराधी! मुख्यमंत्री बीमार, प्रदेश लाचार। ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार हो रही है बिहार में।”

चिराग पासवान ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए लिखा –
“बिहारियों को और कितनी हत्याओं का सामना करना पड़ेगा? पुलिस क्या कर रही है?”

सरकार की सफाई – “हर हत्या का कारण जानिए”

वहीं बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने इन घटनाओं को लेकर सरकार की ओर से सफाई दी है। उन्होंने कहा –
“बिहार में कोई संगठित अपराध नहीं हो रहा है। ज्यादातर हत्याएं आपसी रंजिश या व्यक्तिगत विवाद की वजह से हो रही हैं। हर अपराध को कानून-व्यवस्था से जोड़ना गलत है।”

उन्होंने यह भी कहा कि –
“कोई यह नहीं देखता कि मामले में पुलिस कितनी तेजी से काम कर रही है। खेमका हत्याकांड में पुलिस ने 72 घंटे के अंदर आरोपी की पहचान कर ली थी। ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोक पाना मुश्किल होता है, लेकिन सरकार संगठित अपराध नहीं बढ़ने देगी।”

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जनता डरी, सरकार कठघरे में

लगातार हो रही हत्याओं से जनता डरी हुई है। पुलिस की निष्क्रियता और बढ़ते अपराध से आम लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भले ही सरकार इन घटनाओं को व्यक्तिगत विवाद कहकर टाल रही हो, लेकिन बढ़ती वारदातें साफ संकेत दे रही हैं कि राज्य में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और कानून का खौफ कम होता जा रहा है। विपक्ष भले ही इसे सरकार की विफलता कहे, लेकिन जनता को जवाब चाहिए कि आखिर कब तक ऐसी हत्याएं बिहार में आम रहेंगी?

श्योपुर:-हीरामन बाबा नाले में गिरी ट्रैक्टर ट्रॉली, महिला की मौत, 8 मजदूरों को ग्रामीणों ने बचाया

श्योपुर:- मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। सेसईपुरा थाना अंतर्गत ग्राम मोरावन के पास खेत से लौट रहे मजदूरों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली नाले में गिर गई। हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि 8 मजदूरों को ग्रामीणों ने बहादुरी दिखाते हुए सुरक्षित निकाल लिया।

खेत से लौटते वक्त हुआ हादसा

रविवार शाम करीब 6 बजे यह हादसा उस समय हुआ जब मोरावन निवासी कुछ मजदूर गांव के एक किसान के खेत में धान की रोपाई कर लौट रहे थे। खेत से घर वापस आते समय वे उसी किसान की ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार थे। रास्ते में हीरामन बाबा नाला, जो बरसात की वजह से उफान पर था, पार करते समय चालक ने पानी भरे रपटे में ट्रॉली उतार दी। बहाव तेज होने के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली नाले में पलट गई और ट्रॉली में सवार सभी 9 मजदूर पानी में बह गए।

ग्रामीणों ने दिखाई बहादुरी, 8 लोग सुरक्षित

ट्रॉली गिरते ही इलाके में हड़कंप मच गया। कुछ मजदूर तैरकर बाहर निकल आए, जबकि अन्य ट्रैक्टर के डूबते हिस्से पर फंस गए। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर रस्सियों की मदद से फंसे हुए मजदूरों को बाहर निकाला। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में ग्रामीणों की तेजी से 8 लोगों की जान बचाई जा सकी।

महिला की मौत, शव ट्रैक्टर के नीचे मिला

इस हादसे में एक महिला मजदूर समंदे बाई (पत्नी बाबू जाटव, निवासी मोरावन) की मौत हो गई। वह बहते पानी में फंस गई थी और उसका कोई सुराग नहीं लग पा रहा था। रात करीब 8:30 बजे जब पानी का बहाव थोड़ा कम हुआ, तो ट्रैक्टर के नीचे उसका शव दिखाई दिया। ग्रामीणों और पुलिस ने मिलकर शव को बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए कराहल अस्पताल भिजवाया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया।

रपटे पर कोई सुरक्षा नहीं, प्रशासन पर उठे सवाल

इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को फिर उजागर कर दिया है। बताया जा रहा है कि हीरामन बाबा नाले पर बने रपटे पर न तो कोई बैरिकेडिंग थी, न ही चेतावनी बोर्ड। बारिश के मौसम में पानी भरने के बावजूद कोई रोक-टोक नहीं की गई, जिससे चालक ने लापरवाही से ट्रॉली नाले में उतार दी और यह हादसा हो गया।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

हादसे की सूचना मिलते ही सेसईपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और रात को ही महिला का शव बाहर निकाल लिया गया। पुलिस ने दुर्घटना को लेकर जांच शुरू कर दी है, साथ ही हादसे के जिम्मेदारों के खिलाफ उचित कार्रवाई की बात कही जा रही है।

स्थानीय लोगों में रोष

ग्राम मोरावन के ग्रामीणों में इस हादसे को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि हर साल बारिश में यह नाला खतरा बनता है, लेकिन प्रशासन कोई ठोस इंतजाम नहीं करता। लोगों ने मांग की है कि यहां एक पक्का पुल बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाएं न हों।

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श्योपुर जिले का यह हादसा एक बार फिर बताता है कि कैसे बरसाती मौसम में बुनियादी ढांचे की कमी और प्रशासनिक लापरवाही आम लोगों की जान पर बन आती है। अगर समय रहते नाले पर चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग होती, तो शायद एक महिला की जान बचाई जा सकती थी। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस घटना से सबक लेता है या आने वाले दिनों में फिर कोई ऐसी दुर्घटना होती है।

सावन का पहला सोमवार आज, बाबा महाकाल की पहली सवारी निकलेगी धूमधाम से, उज्जैन में स्कूलों में अवकाश

सावन का पावन महीना शुरू हुए चार दिन हो चुके हैं और आज (सोमवार, 14 जुलाई 2025) सावन का पहला सोमवार है। भगवान शिव के भक्तों के लिए ये दिन विशेष महत्व रखता है। पूरे देश में आज शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हो रहा है, वहीं उज्जैन में बाबा महाकाल की पहली सवारी आज नगर भ्रमण के लिए निकलेगी।

महाकालेश्वर मंदिर में आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी है। भक्त बाबा महाकाल के दर्शन कर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजन कर रहे हैं। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष सजावट की गई है और प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं।

बाबा महाकाल की सवारी में इस बार क्या रहेगा खास?

इस बार की पहली सवारी विशेष तौर पर इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें कई नए धार्मिक और सांस्कृतिक तत्व जोड़े गए हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार, इस वर्ष पहली बार सवारी में जनजातीय कलाकारों की विशेष प्रस्तुति, दत्त अखाड़ा से वैदिक मंत्रोच्चार और जनजातीय दलों की पारंपरिक झांकियां भी शामिल की गई हैं।

सवारी में जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मप्र संस्कृति परिषद की देखरेख में कलाकारों का दल भाग ले रहा है, जो अपनी परंपराओं को प्रस्तुत करेगा। इन झांकियों के माध्यम से आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था और बाबा महाकाल के प्रति श्रद्धा को प्रदर्शित किया जाएगा।

महाकालेश्वर स्वयं मनमहेश स्वरूप में सवारी पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं, जिसे लोकभाषा में ‘शाही सवारी’ कहा जाता है। यह सवारी हर सोमवार को सावन महीने में निकलती है, लेकिन पहली सवारी को सबसे ज्यादा भव्यता के साथ निकाला जाता है।

उज्जैन में सभी स्कूलों में अवकाश

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और शहर में यातायात की व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए उज्जैन कलेक्टर ने जिले के सभी स्कूलों (सरकारी और निजी दोनों) में आज अवकाश घोषित किया है। आदेश के अनुसार, सावन माह के हर सोमवार को जिले में स्कूलों में छुट्टी रहेगी। मंगलवार से रविवार तक स्कूलों में नियमित कक्षाएं लगेंगी।

यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि सवारी के दौरान बच्चे और अभिभावक यातायात अव्यवस्था से प्रभावित न हों और कोई दुर्घटना न हो। साथ ही, इस दिन श्रद्धालुओं की सेवा और व्यवस्था में पुलिस और प्रशासनिक बल पूरी तरह तैनात रहेंगे।

सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम

महाकाल सवारी को लेकर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। उज्जैन पुलिस, होमगार्ड, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरी तरह अलर्ट पर हैं। सवारी मार्ग पर जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन से निगरानी, और दवा-जल वितरण केंद्र स्थापित किए गए हैं।

महाकाल मंदिर समिति की ओर से बताया गया है कि श्रद्धालुओं के लिए जलपान, प्रसाद और शौचालय जैसी सुविधाएं भी सुलभ कराई गई हैं। वहीं, शहर में ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया गया है, जिससे सवारी मार्ग पर भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

श्रद्धालुओं में उत्साह, शिवालयों में भक्ति की बयार

सावन के पहले सोमवार को लेकर उज्जैन, भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत पूरे प्रदेश में शिवभक्तों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। शिव मंदिरों में सुबह से ही लंबी कतारें लगी हैं और ‘बोल बम’, ‘हर हर महादेव’, ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा है।

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सावन का पहला सोमवार शिवभक्तों के लिए बेहद विशेष माना जाता है और उज्जैन में बाबा महाकाल की पहली सवारी न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी एक महत्वपूर्ण आयोजन है। इस बार सवारी में जोड़े गए नए तत्व इसे और भी यादगार बनाएंगे।

सोन नदी में फंसे 25 से ज्यादा गोवंशों को SDERF और होमगार्ड ने बचाया, जोखिम में डाली अपनी जान

सीधी, मध्यप्रदेश – भारी बारिश के चलते उफनाई सोन नदी में सोमवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जिले के जोगदहा घाट पर करीब 25 गोवंश (गाय-बैल) नदी के बीच फंस गए, जिनकी जान बचाने के लिए एसडीईआरएफ (SDERF) और होमगार्ड की टीमों ने लगभग 6 घंटे का सफल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इस दौरान टीम ने जोखिम उठाकर नदी पार कर सभी पशुओं को सुरक्षित बाहर निकाला।

जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह ग्रामीणों ने देखा कि कई गोवंश सोन नदी के बीच छोटे टापू जैसी जगह पर फंसे हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर और बहाव के कारण उनकी जान को खतरा था। ग्रामीणों की सूचना के बाद प्रशासन हरकत में आया और SDERF तथा होमगार्ड की टीम को मौके पर रवाना किया गया।

जोखिम भरा था पूरा इलाका

सोन नदी का जोगदहा घाट क्षेत्र वैसे भी संवेदनशील माना जाता है। यह इलाका सोन घड़ियाल अभ्यारण्य में आता है, जहां मगरमच्छों और घड़ियालों की भारी मौजूदगी रहती है। साथ ही नदी के अंदरूनी हिस्सों में कई जगह नुकीली चट्टानें और तेज बहाव भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की मोटरबोट या नाव चलाना भी मुश्किल था।

इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में जवानों ने रोप लेडर, रस्सियों और सुरक्षात्मक जैकेटों की मदद से नदी में उतरकर गोवंशों को एक-एक करके सुरक्षित किनारे पहुंचाया। इसके बाद टीम के सभी सदस्यों को भी पुल के ऊपर खींचकर निकाला गया।

एक बछड़ा नदी में फंसा मिला, उसे भी बचाया गया

रेस्क्यू के दौरान एक छोटा बछड़ा नदी की चट्टानों के बीच फंसा हुआ मिला, जिसे जवानों ने सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला। इसके बाद टीम ने नदी के पूरे क्षेत्र और आसपास के जंगल-पहाड़ियों को भी सर्च ऑपरेशन के जरिए चेक किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई अन्य गोवंश हताहत न हो।

टीम को राहत मिली जब किसी भी गोवंश के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई। कई जानवरों को नदी पार चरते हुए और कुछ को पहाड़ी पर ऊपर चढ़ते हुए भी देखा गया। कुल मिलाकर, इस अभियान में सभी गोवंशों को सुरक्षित बचा लिया गया, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

प्रशासन रहा सतर्क

इस ऑपरेशन में राजस्व विभाग और पुलिस विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद रही और आवश्यक सहयोग दिया। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए आसपास के गांवों को भी अलर्ट किया है, ताकि आगे किसी और अप्रिय घटना से बचा जा सके।

SDERF और होमगार्ड की टीम की त्वरित कार्रवाई, सूझबूझ और बहादुरी की पूरे इलाके में तारीफ हो रही है।

स्थानीय लोगों ने जताया आभार

इस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ग्रामीणों और पशुपालकों ने राहत की सांस ली और प्रशासन का आभार व्यक्त किया। कई लोगों ने कहा कि यदि समय पर यह रेस्क्यू न होता तो कई जानवरों की जान जा सकती थी।

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इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आपदा की स्थिति में अगर प्रशासन और बचाव एजेंसियां तत्परता से काम करें, तो किसी भी बड़ी घटना को रोका जा सकता है। सोन नदी में गोवंशों का सुरक्षित रेस्क्यू प्रशासन की गंभीरता और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है।

“घबराना मत मामा साथ है” – घायल युवक की मदद को बीच सड़क पर रुके शिवराज सिंह चौहान, भेजा अस्पताल

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर अपने दरियादिल और जनसेवी अंदाज के लिए चर्चा में हैं। रविवार को भोपाल के अवधपुरी इलाके में आयोजित जैन समाज के कार्यक्रम में शामिल होने जाते समय चेतक ब्रिज पर घायल युवक को देखकर उन्होंने अपना काफिला बीच रास्ते में रुकवा दिया और घायल को तुरंत अस्पताल भिजवाया।

सड़क पर दिखी भीड़, मामा ने तुरंत लिया एक्शन

बताया जा रहा है कि चेतक ब्रिज पर शिवराज सिंह चौहान का काफिला गुजर रहा था। इसी दौरान उन्होंने सड़क पर लोगों की भीड़ देखी, तो गाड़ी रुकवाकर खुद उतर पड़े। पास जाकर देखा तो एक युवक सड़क हादसे में घायल पड़ा हुआ था। स्थिति को भांपते ही शिवराज ने अपने स्टाफ से कहा –
“घबराना मत, मामा साथ है”

घायल को भेजा अपनी गाड़ी में अस्पताल

शिवराज सिंह चौहान ने तुरंत युवक को अपनी गाड़ी में बैठाकर अस्पताल भिजवाया। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित अस्पताल प्रबंधन को फोन कर घायल का तुरंत इलाज शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही एक अधिकारी को मौके से अस्पताल पहुंचने को कहा, ताकि घायल युवक को किसी भी तरह की परेशानी ना हो।

जनता ने जताया आभार – “मामा हम आपको मिस करते हैं”

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तालियों और नारों से शिवराज का स्वागत किया। कई लोगों ने कहा –

“मामा हम आपको बहुत मिस करते हैं, आप सच में जनता के नेता हैं!”

कुछ ने कहा कि यही फर्क है एक जननेता और रस्मी नेता में। जो सिर्फ भाषण नहीं देते, बल्कि मौके पर मदद करते हैं

जनता से गहरा जुड़ाव, बार-बार मिलते हैं ऐसे उदाहरण

शिवराज सिंह चौहान को लोग “मामा” कहकर बुलाते हैं और उनकी छवि एक भावुक, संवेदनशील और जमीनी नेता की रही है। चाहे बाढ़ हो, सड़क हादसा हो या किसी गरीब की परेशानी – शिवराज कई बार मौके पर पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से मदद करते रहे हैं

इससे पहले भी जब वे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने कई बार बच्चों को अस्पताल पहुंचाया, बुजुर्गों के इलाज का खर्च उठाया और गरीब बेटियों की शादी में खुद शामिल होकर आशीर्वाद भी दिया।

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इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि राजनीति में संवेदनशीलता और मानवता सबसे बड़ी शक्ति होती है। शिवराज सिंह चौहान का यह मानवीय चेहरा न सिर्फ उनके समर्थकों को गर्व से भरता है, बल्कि राजनीति के मंच पर एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है

जनता ने जब कहा, “मामा, हम आपको बहुत मिस करते हैं”, तो शायद यह सिर्फ एक भावनात्मक टिप्पणी नहीं थी, बल्कि उस विश्वास का प्रतीक है, जो लोग एक सच्चे जनसेवक में ढूंढते हैं।

छतरपुर में बेकाबू बारिश ने ली एक की जान, बह गई पिकअप; जनजीवन बेहाल, प्रशासन लापरवाह!

छतरपुर, मध्यप्रदेश: जिले में लगातार जारी तेज बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में छतरपुर-टीकमगढ़ मार्ग पर पचेर घाट में एक मालवाहक पिकअप तेज बहाव में बह गई। हादसे में वाहन के चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पिकअप में सवार दो अन्य युवक बहते पानी के बीच संघर्ष करते हुए पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाने में सफल रहे

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जहां यह हादसा हुआ, वहां पुलिया पहले से ही बह चुकी थी, बावजूद इसके न कोई बैरिकेडिंग थी, न ही कोई चेतावनी संकेत। यह प्रशासनिक लापरवाही अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।

पेड़ बना जीवन का सहारा

हादसे में जान बचाने वाले युवक बुरी तरह डरे हुए हैं। उन्होंने बताया कि जब वाहन पानी में डूबने लगा, तो वे दोनों किसी तरह बाहर निकले और बहाव में बहते हुए पास के एक पेड़ पर चढ़ गए। वे रातभर वहीं फंसे रहे और सुबह ग्रामीणों ने उन्हें बचाया। लेकिन ड्राइवर पानी में बह गया, जिसका शव कुछ घंटे बाद नीचे के हिस्से में मिला।

जिलेभर में तबाही का आलम

  • देवगांव-देवरा मार्ग पर बन्ने नदी उफान पर है, जिससे पुल के दोनों ओर की सड़कें बह गई हैं। आवागमन पूरी तरह ठप हो चुका है, दर्जनों वाहन फंसे हुए हैं, और ग्रामीण वैकल्पिक मार्गों से गुजरने को मजबूर हैं।
  • बिजावर-मातगुंवा मार्ग का रगोली पुल भी बह गया है, जिससे बिजावर से सागर और कानपुर का संपर्क टूट गया है।
  • छतरपुर-सटई रोड पर रौरा गांव के पास भी पुल की सड़क बहने से पूरा मार्ग बंद हो गया है।
  • देवरा क्षेत्र में 6 बिजली के खंभे बह गए हैं, जिससे कई गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। इस कारण जरूरी सेवाएं पूरी तरह ठप हैं।

प्रशासन पर उठे सवाल

बारिश से उपजे संकट के बाद लोगों में गुस्सा और नाराजगी साफ दिख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को बारिश से पहले ही सावधानी के उपाय करने चाहिए थे। लेकिन न तो नदी-नालों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए, और न ही पुलों की हालत जांची गई

हादसे वाली जगह पर अगर पहले से बैरिकेडिंग होती, तो एक जिंदगी बच सकती थी। अब आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं।

क्या कहता है प्रशासन?

फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ना ही राहत और बचाव कार्य की गति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बारिश का यही दौर बना रहा, तो और भी हादसों की आशंका है। वे प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द चेतावनी संकेत, बैरिकेडिंग और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की जाए।

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छतरपुर जिले में जारी बारिश अब सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं रह गई है, यह प्रशासन की लापरवाही और सिस्टम की नाकामी का जीवंत उदाहरण बन गई है। एक और जान चली गई, कई गांव अंधेरे में हैं, रास्ते टूट चुके हैं, और लोग बेसहारा हैं। ज़रूरत है कि अब जिला प्रशासन नींद से जागे और तत्काल प्रभाव से आपात प्रबंधन और जन सुरक्षा के कदम उठाए, वरना आने वाले दिन और भी भारी पड़ सकते हैं।

करणी सेना का उग्र प्रदर्शन: हरदा में पुलिस-प्रदर्शनकारी आमने-सामने, लाठीचार्ज और 3 दर्जन गिरफ्तार

मध्यप्रदेश के हरदा जिले में करणी सेना और पुलिस के बीच टकराव ने रविवार को हिंसक रूप ले लिया। शनिवार शाम शुरू हुआ यह विवाद रविवार को भी पूरे शहर में तनाव का कारण बना रहा। करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने ठगी के एक मामले में पुलिस पर आरोपी को बचाने का आरोप लगाते हुए सिटी कोतवाली थाने के बाहर प्रदर्शन किया, जो देखते ही देखते हिंसा में बदल गया। इसके बाद रविवार सुबह पुलिस और करणी सेना के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हुई। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछारों का सहारा लिया।

विवाद की शुरुआत

करणी सेना के जिलाध्यक्ष सुनील सिंह राजपूत के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक ठगी के मामले में पुलिस ने रिश्वत लेकर आरोपी को बचा लिया। इसी को लेकर कार्यकर्ता सिटी कोतवाली पहुंचे और जोरदार विरोध दर्ज कराया। शनिवार को पुलिस ने चार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, जिसके विरोध में रातभर हरदा बायपास पर चक्काजाम चलता रहा।

रविवार को उग्र प्रदर्शन

रविवार सुबह करणी सेना के संस्थापक जीवन सिंह शेरपुर भी प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रादेशिक पदाधिकारी और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उन्होंने फिर से मोर्चा संभाला। पुलिस ने समझाइश की कोशिश की लेकिन प्रदर्शनकारियों ने हटने से इनकार कर दिया। इसके बाद हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े। करीब तीन दर्जन से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया।

छापेमारी और गिरफ्तारी

पुलिस ने शहर के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी कर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। राजपूत छात्रावास और मोबाइल टावर में छिपे लोगों को भी बाहर निकालकर गिरफ्तार किया गया। प्रशासन ने हरदा के साथ-साथ नर्मदापुरम, रायसेन, बैतूल और भोपाल से अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया। मौके पर फॉरेस्ट और नगर पालिका की टीमों को भी तैनात किया गया। इस दौरान दर्जनों गाड़ियां जब्त की गईं।

प्रशासन की सफाई

कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने बताया कि बार-बार समझाने के बावजूद प्रदर्शनकारी नहीं माने। हालात बिगड़ते देख हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और शांति बहाल करने के प्रयास जारी हैं।

क्या है ठगी का मामला?

हरदा निवासी आशीष राजपूत ने आरोप लगाया कि एक पंडित की सलाह पर उसने 18 लाख रुपये में 1.52 कैरेट का हीरा खरीदा। यह सौदा मोहित वर्मा और विक्की लोधी के माध्यम से हुआ, जिन्होंने उसे मुंबई ले जाकर हीरा दिखाया। हीरा ज्वेलरी शॉप में चेक भी कराया गया और असली पाया गया। लेकिन बाद में वही हीरा नकली निकला। आरोप है कि उसके साथ धोखाधड़ी कर नकली हीरा थमाया गया और चेक भी बाउंस हो गए। इस पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया लेकिन करणी सेना का आरोप है कि 2.5 लाख की रिश्वत लेकर आरोपी को बचाया गया।

आगे क्या?

प्रशासन फिलहाल सख्ती बरत रहा है। गिरफ्तार किए गए लोगों पर कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। करणी सेना की ओर से मामले में जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है, वहीं पुलिस ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।

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यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि जब पुलिस पर भरोसा कमज़ोर होता है, तब कानून हाथ में लेने की कोशिशें उग्र रूप ले लेती हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन जांच में कितनी पारदर्शिता रखता है और क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होती है या फिर यह भी एक राजनीतिक मोड़ ले लेता है