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प्यार, ज़मीन और साज़िश: पत्नी ने प्रेमी संग रचा खौफनाक खेल, पति की हत्या को बना दिया आत्महत्या का ड्रामा

आगरा, उत्तर प्रदेश।
फतेहपुर सीकरी के दुल्हारा गांव से एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों की सारी हदें पार कर दीं। एक पत्नी ने अपने ही पति की हत्या कर डाली — वो भी अपने प्रेमी के साथ मिलकर, और वजह थी आठ बीघा ज़मीन।

हत्या या आत्महत्या? पहला शक

शुरुआत में ये पूरा मामला आत्महत्या जैसा पेश किया गया था। पति के गले में साड़ी का फंदा डालकर महिला ने दावा किया कि उसका पति खुदकुशी कर चुका है। लेकिन पुलिस की नजरें ठहर गईं — कहानी में झोल था। मौके की परिस्थिति, महिला का व्यवहार और गांव वालों की चर्चाएं सबकुछ इशारा कर रहे थे कि मामला कुछ और है।

पुलिस पूछताछ में खुला राज

जब पुलिस ने मृतक की पत्नी प्रीति से कड़ाई से पूछताछ की तो शुरुआत में उसने घुमाने की कोशिश की। लेकिन सवालों की बौछार और साक्ष्यों की मौजूदगी ने उसे तोड़ दिया। प्रीति ने कबूल किया कि उसने अपने मुंह बोले भाई — जो असल में उसका प्रेमी था — के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की।

जमीन और ज़हर भरा रिश्ता

प्रीति ने खुलासा किया कि उसका पति उसे प्रताड़ित करता था और खेत अपने नाम नहीं कर रहा था। यही नहीं, पति की मारपीट और शक ने उसे अंदर ही अंदर झुलसा दिया था। इसी बीच उसका प्रेमी — जो समाज की नजर में उसका भाई था — उसकी ज़िंदगी में आया। दोनों ने मिलकर उस शख्स को रास्ते से हटाने की योजना बनाई जिसने कभी साथ जीने-मरने की कसम खाई थी।

प्रेमी फरार, पत्नी गिरफ्तार

हत्या के बाद प्रीति और उसका प्रेमी गांव छोड़कर भाग निकले थे। हालांकि पुलिस ने प्रीति को पकड़ लिया, लेकिन प्रेमी अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

हत्या की रात

जानकारी के मुताबिक, शनिवार की रात को प्रीति और उसके प्रेमी ने मिलकर अपने पति की हत्या की। हत्या के बाद उन्होंने साड़ी का फंदा बनाकर शव को आत्महत्या जैसा रूप देने की कोशिश की, ताकि किसी को शक न हो। लेकिन क्राइम सीन पर छोटी-छोटी चूक ने बड़ी सच्चाई खोल दी।

अब क्या आगे?

प्रीति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और जल्द ही उसे अदालत में पेश किया जाएगा। प्रेमी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे भी हिरासत में लिया जाएगा।

सवाल जो रह गए

  • क्या सिर्फ ज़मीन ही वजह थी या और भी कुछ?
  • क्या गांव वालों को प्रेम-प्रसंग की भनक पहले से थी?
  • क्या पति को अपने अंत का आभास था?

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यह मामला न सिर्फ अपराध की, बल्कि टूटते रिश्तों और लालच की खौफनाक मिसाल बनकर सामने आया है। प्यार जब ज़हर बन जाए, और ज़मीन जब खून की कीमत तय करे — तो इंसानियत हार जाती है।

छात्रों की साइकिलें बिकने जा रही थीं बाजार में! खटाई स्कूल से जुड़े शिक्षक के घर में पकड़ी गईं शासकीय साइकिलें

सिंगरौली, चितरंगी जिले के चितरंगी विकासखंड में सरकारी योजना के तहत स्कूली छात्रों के लिए आई शासकीय साइकिलें बाजार में खपाने की तैयारी में थीं। लेकिन ऐन वक्त पर पुलिस ने छापा मारकर इन साइकिलों को एक निजी घर से बरामद कर लिया। मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खटाई से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां इन साइकिलों को छात्रों को वितरित किया जाना था।

सूत्रों के अनुसार, यह साइकिलें छात्रों को निशुल्क वितरण हेतु शासन द्वारा भेजी गई थीं, लेकिन इन्हें संकुल प्राचार्य द्वारा चोरी-छुपे खैरा गांव स्थित एक निजी घर में छिपाकर रखा गया था, जहां से उनकी बिक्री की तैयारी चल रही थी। स्थानीय ग्रामीणों को जब इस पर संदेह हुआ, तो उन्होंने चुपचाप सूचना पुलिस को दे दी।

चितरंगी पुलिस ने मारा छापा, साइकिलें जब्त

चितरंगी थाना पुलिस ने सूचना मिलते ही बिना देर किए खैरा गांव में छापेमारी की। घर की तलाशी के दौरान कई शासकीय साइकिलें वहां पाई गईं, जिन पर स्कूल और योजना संबंधी मुहरें साफ तौर पर अंकित थीं। पुलिस ने तत्काल साइकिलों को जब्त कर लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने प्राथमिक पूछताछ के बाद बताया कि यह साइकिलें शासकीय स्कूल, खटाई के छात्रों को वितरित की जानी थीं, लेकिन इन्हें बेचने की नीयत से जानबूझकर निजी स्थान पर छिपाकर रखा गया था।

क्या प्राचार्य के घर से मिलीं साइकिलें?

एक अहम पहलू यह भी है कि जिस घर से साइकिलें बरामद की गईं, वह कथित रूप से खटाई प्राचार्य का ही है, या उनसे जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। हाल ही में यही प्राचार्य सोशल मीडिया पर अपनी प्रशंसा करवाने के लिए खबरें चलवा रहे थे, जो अब इस खुलासे के बाद कटघरे में आ गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहली बार नहीं है। पूर्व में भी छात्र हित के सामान, जैसे यूनिफॉर्म, किताबें और मिड-डे मील सामग्री के दुरुपयोग की खबरें आती रही हैं, लेकिन इस बार मामला पुलिस के शिकंजे तक जा पहुंचा।

छात्र हितों पर चोट, शासन की योजना पर धब्बा

सरकार द्वारा चलाई जा रही निशुल्क साइकिल वितरण योजना का उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में पढ़ने वाले छात्रों को स्कूल तक आने-जाने में सहूलियत देना है। लेकिन जिस प्रकार से इस योजना का दुरुपयोग हुआ है, उससे शासन की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और अभिभावकों ने मामले को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यह “छात्रों के अधिकारों की सीधी चोरी” है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

जांच जारी, प्रशासन सख्ती में

चितरंगी थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी गई है, और जैसे-जैसे तथ्यों की पुष्टि होती जाएगी, आरोपी पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल साइकिलों को थाने में जब्त रखा गया है और मामले से जुड़े दस्तावेजों की तलाश की जा रही है।

खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को भी सूचना दे दी गई है, और संभावना है कि शिक्षा विभाग अलग से विभागीय जांच बैठाएगा।

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क्या बोले अधिकारी?

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा:

“इस मामले को हम गंभीरता से ले रहे हैं। सरकारी संपत्ति का इस तरह दुरुपयोग न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।”

जनता में रोष, कार्रवाई की मांग

इस पूरे घटनाक्रम से क्षेत्र में शिक्षा विभाग की छवि को गहरा धक्का पहुंचा है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने सख्त नाराजगी जताते हुए मामले में निष्पक्ष और शीघ्र न्याय की मांग की है। यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो स्थानीय समाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं।

रीवा मेडिकल कॉलेज में बड़ा हंगामा: 80 नर्सिंग छात्राओं ने डॉक्टर पर उत्पीड़न का आरोप लगाया, ABVP ने किया घेराव

रीवा (मध्यप्रदेश)।
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा में महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कॉलेज के ENT विभाग में पदस्थ डॉक्टर असरफ पर 80 से अधिक नर्सिंग छात्राओं ने मानसिक उत्पीड़न और असहज व्यवहार के आरोप लगाए हैं। इस सामूहिक शिकायत के बाद कॉलेज परिसर में ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) ने उग्र प्रदर्शन करते हुए डीन कार्यालय का घेराव कर दिया।

डीन को ज्ञापन, डॉक्टर पर लगे इस्तीफे के नारे

मंगलवार 9 जुलाई को कॉलेज परिसर उस समय हंगामे का केंद्र बन गया जब छात्राएं और ABVP कार्यकर्ता “डॉक्टर असरफ बर्खास्त हो”, “डीन तुम शर्म करो” जैसे नारे लगाते हुए डीन कार्यालय के बाहर एकत्र हो गए।
ABVP के जिला संयोजक पीएन पांडेय ने कहा,

“80 छात्राओं की एक जैसी शिकायतें इस बात का प्रमाण हैं कि मामला गंभीर है। यह रीवा मेडिकल कॉलेज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला शर्मनाक प्रसंग है। आरोपी डॉक्टर को तुरंत हटाया जाना चाहिए।”

छात्राओं ने किया ENT डिपार्टमेंट की ड्यूटी से इनकार

छात्राओं ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह अब ENT विभाग में ड्यूटी नहीं करेंगी। उनका आरोप है कि डॉक्टर असरफ का व्यवहार डराने-धमकाने वाला है, जिससे क्लीनिकल ट्रेनिंग का पूरा माहौल प्रभावित हो रहा है।
पीड़ित छात्राएं पहले ही डीन और प्राचार्य को शिकायत सौंप चुकी थीं, जिसमें उन्होंने बताया कि डॉक्टर आए दिन नाम लेकर टारगेट करते हैं, अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हैं, और बार-बार मानसिक प्रताड़ना देते हैं।

प्रशासन की पहली कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्राचार्य ने ENT विभाग में छात्राओं की ड्यूटी पर तत्काल रोक लगा दी है। साथ ही, डीन को पत्र भेजकर आंतरिक जांच की मांग की है।

डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।

  • इस जांच समिति की अध्यक्षता नेत्र रोग विभाग की वरिष्ठ डॉक्टर शशि जैन करेंगी।
  • समिति को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।

पूर्व में भी विवादों में रहा ENT विभाग

यह पहला मौका नहीं है जब ENT विभाग विवादों में आया है।
हाल ही में इसी विभाग में एक वार्डबॉय पर नाबालिग लड़की से दुर्व्यवहार और गैंगरेप जैसे गंभीर आरोप लगे थे। अब छात्राओं की सामूहिक शिकायत ने कॉलेज की महिला सुरक्षा नीति और प्रशासन की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

क्या होगी कार्रवाई? अब सबकी नजर जांच समिति पर

कॉलेज में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या यह जांच निष्पक्ष होगी?
क्या प्रशासन सिर्फ “समिति बनाकर” मामले को ठंडे बस्ते में डालेगा या इस बार कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा?
वहीं ABVP ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जांच रिपोर्ट में लापरवाही पाई गई या कार्रवाई नहीं हुई, तो अगला कदम सड़क से सदन तक आंदोलन होगा।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान नगर मंत्री हर्ष साहू , जिला संयोजक पशुपति नाथ पांडे, भाग संयोजक पवन द्विवेदी, दिशा मिश्रा , दीक्षा शर्मा , उन्नति सिंह , आशीष द्विवेदी, अनुराग द्विवेदी, ओम शुक्ला, हर्ष भदौरिया, गौरव मिश्र , आदि सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे

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महिला सुरक्षा सिर्फ पोस्टर या वास्तव में प्राथमिकता?

रीवा जैसे शैक्षणिक और चिकित्सा क्षेत्र के प्रमुख संस्थान में जब 80 छात्राएं एकसाथ उत्पीड़न की शिकायत करें, तो यह सिर्फ एक विभाग की नहीं, पूरे सिस्टम की नाकामी मानी जानी चाहिए।
अब देखने वाली बात होगी —
क्या डॉक्टर असरफ पर कड़ी कार्रवाई होती है,
या फिर ‘जांच चल रही है’ का हवाला देकर फिर एक बार न्याय को टाल दिया जाएगा?