मध्य प्रदेश के शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में वर्ष 2017 के बाद से छात्र संघ चुनाव नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। यह स्थिति केवल प्रशासनिक उदासीनता नहीं, बल्कि छात्र लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के हनन का प्रतीक है। छात्र संघ चुनाव युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं, जहाँ से भविष्य के नेतृत्व का निर्माण होता है।
छात्र संघों के माध्यम से ही छात्र अपनी समस्याएँ संगठित रूप में प्रशासन तक पहुँचाते हैं। फीस वृद्धि, परीक्षा प्रणाली की कमियाँ, छात्रवृत्ति में देरी, शैक्षणिक संसाधनों की कमी, हॉस्टल और पुस्तकालय से जुड़ी दिक्कतें जैसे मुद्दों पर छात्र प्रतिनिधि निर्णायक भूमिका निभाते हैं। चुनाव न होने से छात्रों की आवाज़ कमजोर पड़ जाती है और संवाद की प्रक्रिया बाधित होती है।

आज प्रदेश का छात्र समाज वर्षों से प्रतिनिधित्वविहीन है। युवा शक्ति को उनके ही परिसरों में लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखना चिंताजनक है। छात्र संघ चुनाव नेतृत्व, अनुशासन और उत्तरदायित्व के संस्कार विकसित करते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित लिंगदोह समिति की सिफारिशों के तहत शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव संभव हैं। अब समय आ गया है कि सरकार छात्र संघ चुनाव की घोषणा करे। छात्र लोकतंत्र की बहाली छात्र हित और लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य है।




